बीस रुपये की दवा, लाखों की दुआ – सेहुड़ा के कैलाश सोनी की सेवा कहानी

संतकबीरनगर। सेमरियावां विकासखंड के उजियार क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सेहुड़ा गांव में एक छोटी-सी क्लीनिक आज ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत बन चुकी है। सीमित संसाधनों के बीच यहां से मिल रही सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा ने कैलाश सोनी को गांव ही नहीं, आसपास के इलाकों में भी भरोसे का नाम बना दिया है।
युवा समाजसेवी कैलाश सोनी (सेहुड़ा) ने स्वास्थ्य सेवा को व्यवसाय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाया है। उनकी क्लीनिक पर रोज़ाना ऐसे मरीज पहुंचते हैं जिनके पास इलाज के लिए पर्याप्त पैसे नहीं होते। फिर भी किसी को निराश लौटना नहीं पड़ता।
हाल ही में एक बुजुर्ग किसान कांपते हाथों से 20 रुपये बढ़ाते हुए बोले, “डॉक्टर साहब, दो खुराक दवा दे दीजिए।” कैलाश ने मुस्कुराकर दवा दी और भरोसा दिलाया कि वे जल्द स्वस्थ होंगे। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक कर देने वाला था। ग्रामीणों का कहना है कि कैलाश की क्लीनिक में दवा के साथ अपनापन और सम्मान भी मिलता है।
कैलाश सोनी का स्पष्ट मानना है कि बीमारी अमीर-गरीब का भेद नहीं करती, इसलिए इलाज भी समान भाव से होना चाहिए। जरूरतमंदों से वे कई बार फीस नहीं लेते और गंभीर मरीजों को समय रहते बड़े अस्पताल जाने की सलाह भी देते हैं। यही संवेदनशीलता उन्हें अलग पहचान देती है।
ग्राम पंचायत बाघनगर के ग्राम प्रधान अफजाल अहमद ने भी कैलाश सोनी के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि गांव में इस तरह की सेवा भावना समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को भी ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि गांव स्तर पर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था और सशक्त हो सके। सीमित संसाधनों में सेवा का जो उदाहरण कैलाश सोनी ने प्रस्तुत किया है, वह युवाओं के लिए प्रेरणा है।
आज जब इलाज महंगा होता जा रहा है, ऐसे समय में “बीस रुपये की दवा” सचमुच “लाखों की दुआ” बनकर सामने आ रही है। सेहुड़ा का यह युवा समाजसेवी साबित कर रहा है कि यदि मन में सेवा का जज्बा हो, तो छोटी-सी क्लीनिक भी उम्मीद का बड़ा केंद्र बन सकती है।



