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Home 25 खबरें 25 अयोध्या / भूमि विवाद मामले में संघ नेताओं का कहना है कि फैसला आने पर हर कोई खुशी का इजहार करेगा, लेकिन यह हम सब की जिम्मेदारी है कि किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत न हों।

अयोध्या / भूमि विवाद मामले में संघ नेताओं का कहना है कि फैसला आने पर हर कोई खुशी का इजहार करेगा, लेकिन यह हम सब की जिम्मेदारी है कि किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत न हों।

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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा- सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे कोर्ट के फैसले का सम्मान करें

बैठक में संघ नेताओं ने कहा- अयोध्या पर फैसले के बाद खुशी में दीप जलाएं, मंदिरों में पूचा-अर्चना करें

‘किसी समुदाय विशेष के निकट से जुलूस निकालने जैसा व्यवहार करने की जरूरत नहीं, शांति बनाए रखें’

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट अगले कुछ दिनों में अयोध्या भूमि विवाद मामले में फैसला सुना सकता है। इसके मद्देनजर दिल्ली के आध्यात्म साधना केंद्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने देश में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए पिछले दो दिनों तक विचार विमर्श किया। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या केस में 40 दिन सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा लिया है।

एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि किसी विशेष समुदाय के निकट से जुलूस निकालने जैसा आक्रामक व्यवहार दिखाने की जरूरत नहीं है। भाजपा और संघ दोनों शांति बनाए रखने की पूरी कोशिश करेंगे। फैसले आने के बाद खुशी में विभिन्न धार्मिक समूहों के लोग दीप जला सकते हैं या पूजा-अर्चना के लिए अपने धार्मिक स्थलों पर जा सकते हैं। इस बैठक में भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्‌डा, संघ प्रमुख मोहन भागवत, सुरेश भैयाजी जोशी, दत्तात्रेय होसबोले और मनमोहन वैद्य, विश्व हिंदू परिषद के जस्टिस वीएस कोकजे और आलोक कुमार मौजूद रहे।

अयोध्या मामला स्वतंत्र भारत का संवेदनशील मामला: मुस्लिम बोर्ड

वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महाली ने कहा कि इमामों को सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने, संविधान और न्यायपालिका में विश्वास बनाए रखने की सलाह देनी चाहिए। फिरंगी ने कहा, “कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट अयोध्या मामले पर जल्द ही फैसला सुना सकता है। आप जानते हैं कि यह केस स्वतंत्र भारत का बड़ा और संवेदनशील मामला है। पूरा देश और वैश्विक समुदाय सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर बनाए हुए है। इसलिए, सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे फैसले का सम्मान करें और शांति बनाए रखें।”

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