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फर्जी डाॅक्टर ने 9 साल में 90 हजार मरीज जांचे, पकड़े जाने पर बाेला- ट्रेन में पड़ी मिली थी डिग्री || WI NEWS

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राजस्थान में सीकर के निजी अस्पताल से पकड़ा गया एक लाख रुपए वेतन लेने वाला फर्जी डॉक्टर

सभी मरीजों को एक जैसी दवा देता था, सीकर में मरीज की हालत बिगड़ने पर मामले का खुलासा हुआ

 राजस्थान पुलिस ने सीकर में एक प्राइवेट अस्पताल से फर्जी डॉक्टर काे पकड़ा है। मानसिंह बघेल (44) नाम का यह व्यक्ति कृष्ण कन्हैया केयर अस्पताल में हर महीने एक लाख रुपए का वेतन भी ले रहा था। दिनभर में करीब 25 मरीजों काे जांचता था। एक मरीज की हालत बिगड़ने के बाद अस्पताल प्रशासन की जांच में उसका भांडा फूट गया।

महज 12वीं पास मानसिंह पांच महीने से सीकर में तैनात था। इससे पहले उसने 9 साल तक आगरा में क्लीनिक चलाया। दोनों जगहों पर उसने करीब 90 हजार मरीजाें काे जांचा। उसका दावा है कि पांच साल पहले मथुरा जाते समय उसे ट्रेन में डाॅक्टर मनाेज कुमार की डिग्री पड़ी मिली थी। उसी के अनुसार अपने बाकी फर्जी पहचान पत्र भी तैयार कर लिए थे। सीकर के अस्पताल में वह मरीजों को एक जैसी दवा ही देता था।

मरीज को पैरासीटामोल जैसी सामान्य दवाएं लिखता था

इलाज के लिए घरेलू नुस्खे ज्यादा आजमाने की बात करता था। जून के दूसरे हफ्ते में एक महिला दिल की बीमारी का इलाज कराने पहुंची। इस फर्जी डॉक्टर ने महिला को ड्रिप चढ़ा दिया। हालत बिगड़ने पर उसे दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ा। अस्पताल प्रशासन ने जब उसके वोटिंग कार्ड की जांच की, ताे उसमें दूसरी पहचान मिली। मानसिंह मूल आगरा का रहने वाला है। वह सभी मरीजों को पैरासीटामोल जैसी सामान्य दवाएं लिखता था। गंभीर मरीजों को अन्य अस्पताल रेफर कर देता था। 


मामले का पता लगने पर असली डाॅक्टर पहुंचे 
असली डाॅक्टर मनाेज कुमार का हरियाणा के पलवल जिले में सहारा अस्पताल है। उनकी पत्नी प्रियंका भी डाॅक्टर हैं। उनकी डिग्री के नाम पर फर्जी तरीके से नाैकरी करने की जानकारी मिलने पर वह सीकर आए। उन्हाेंने बताया कि उनका बैग 2005 में बस से चाेरी हाे गया था। उन्हाेंने बैग चाेरी हाेने की रिपाेर्ट भी दर्ज करवाई थी। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि अगर मनोज का बैग 2005 में चोरी हुआ था, तो मानसिंह को डिग्री पांच साल पहले ट्रेन में कैसे मिली?

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